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पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर और आदिवासी जनसंहार पर माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का तीखा प्रहारهجوم بَهَلغَام، عملية "سِندور" ومجزرة السكان الأصليين: الأمين العام لحزب الماويين (CPI-ML) ديبانكار بهاتاشاريا يوجه انتقادات حادة

 संवाददाता सम्मेलन से जारी

पटना, 23 मई 2025
पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर और आदिवासी जनसंहार पर माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य का तीखा प्रहार
माले महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने आज पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के एक महीने बीत जाने के बावजूद अब तक देश को कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है और न ही किसी आतंकी की गिरफ्तारी हुई है.
जब यह घटना घटी प्रधानमंत्री पहलगाम जाने की बजाय मधुबनी पहुंच गए और वहां सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने आतंकियों को मिट्टी में मिला देने की बात कही. लेकिन अबतक उसमें शामिल एक भी आतंकी का सुराग नहीं मिल पाया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी जवाबी हमले में मारे गए भारतीय नागरिकों के परिजनों को सांत्वना देने अथवा राहत प्रदान करने के लिए भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है.
कामरेड दीपंकर ने कहा कि देश की साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष की गौरवशाली विरासत रही है. शाहाबाद में वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में और हिंदू-मुस्लिम एकता के आधार पर भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में इस क्षेत्र की अहम भूमिका रही. लेकिन आज की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ट्रम्प के समक्ष पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका द्वारा भारतीयों की अपमानजनक निकासी, मनमाने टैरिफ थोपने और भारत-पाक युद्ध विराम की ट्रम्प द्वारा की गई एकतरफा घोषणा पर प्रधानमंत्री की चुप्पी उनकी विफल विदेश नीति को उजागर करती है. ऑपरेशन सिंदूर के समय दुनिया के किसी भी देश ने भारत का समर्थन नहीं किया — यह मोदी सरकार की कूटनीतिक असफलता का प्रमाण है.
पूरे विपक्ष द्वारा इन सवालों पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को नकार कर सरकार सांसदों के विदेश दौरों में व्यस्त है.
उन्होंने कहा कि बिहार में जनता की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के समूल उन्मूलन के लिए इंडिया गठबंधन को सत्ता में लाना अत्यंत आवश्यक है.
माले महासचिव ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-बीजापुर इलाके में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव कामरेड केशव राव सहित अनेक माओवादी कार्यकर्ताओं और आम आदिवासियों की हुई नृशंस हत्या की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस खबर को उत्सवी अंदाज़ में प्रस्तुत करना बेहद निंदनीय है. इससे स्पष्ट होता है कि सरकार 'ऑपरेशन कगार' के ज़रिए न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर आदिवासी इलाकों में एक सुनियोजित सैन्य अभियान चला रही है, ताकि माओवाद विरोधी कार्रवाई की आड़ में कॉर्पोरेट लूट और सैन्यीकरण के खिलाफ उठ रही आदिवासी आवाज़ों को कुचला जा सके.
उन्होंने इस जनसंहार की न्यायिक जांच कराने और माओवादियों द्वारा घोषित एकतरफा युद्धविराम के बावजूद उन पर चल रही सैन्य कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग की.
संवाददाता सम्मेलन में माले विधान पार्षद और स्कीम वर्कर्स यूनियन की नेता कामरेड शशि यादव ने बताया कि 20 मई से बिहार की आशा कर्मी हड़ताल पर हैं. उनकी मांग है कि सरकार पूर्व में किए गए समझौते को तत्काल लागू करे। उन्होंने रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की लंबित मांगों को भी इसमें जोड़ते हुए सरकार से अविलंब समाधान की मांग की.
कामरेड शशि यादव ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को तुरंत पूरा नहीं किया गया, तो राज्य के सभी मंत्रियों और मुख्यमंत्री का जगह-जगह घेराव किया जाएगा.
काराकाट के सांसद और अखिल भारतीय किशन महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि आगामी 30 मई 2025 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का एक कार्यक्रम रोहतास जिला के विक्रमगंज में तय हुआ है. इस मौके पर उस क्षेत्र के किसान व आमलोग उनसे इंद्रपुरी जलाशय का यथाशीघ्र निर्माण कराने, सोन नहरों का आधुनिकीकरण कर सोन नहरों के निचले हिस्से (टेल प्वाइंट) तक सालों भर पानी का प्रबंध करने, चीर प्रतीक्षित दुर्गावती सिंचाई परियोजना, मलई बराज (मलियाबाग) परियोजना एवं उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना कार्य यथाशीघ्र पूरा कराने और कुटकू डैम में फाटक लगाने, डालमियानगर के उद्योगों को फिर से चालू कराने और डालमियानगर में प्रस्तावित रेल कारखाना को यथाशीघ्र निर्माण कराने का प्रबंध करने, भारत माला सड़क परियोजना एवं ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की अधिग्रहित किए जा रहे कृषि भूमि का 2013 के कानून के मुताबिक वर्तमान बाजार दर से चार गुणा मुआवजा दिया जाए और किसानों से बिना समुचित मुआवजा के बलपूर्वक कृषि भूमि अधिग्रहण पर अविलंब रोक लगाने, मार्केटिंग पर राष्ट्रीय प्रस्ताव वापस लिया जाए। सभी फसलों का सी 2+50% एमएसपी की कानूनी गारंटी के साथ सरकारी खरीद की गारंटी करने व बिहार में एपीएमसी ऐक्ट को पुनर्बहाल करते हुए कृषि मंडियों को पुनः चालू करने कि मांग पर 28 मई को शाहाबाद व मगध क्षेत्र के सभी जिलों में धरना दिया जाएगा.
संवाददाता सम्मेलन में माले राज्य सचिव कामरेड कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा और विधायक दल के उपनेता सत्यदेव राम भी उपस्थित थे.


صادر عن مؤتمر صحفي – باتنا، 23 مايو 2025

هجوم بَهَلغَام، عملية "سِندور" ومجزرة السكان الأصليين: الأمين العام لحزب الماويين (CPI-ML) ديبانكار بهاتاشاريا يوجه انتقادات حادة

وجّه الأمين العام لحزب الماويين (CPI-ML) الرفيق ديبانكار بهاتاشاريا انتقادات شديدة لسياسات الحكومة المركزية ورئيس الوزراء ناريندرا مودي خلال مؤتمر صحفي عُقد اليوم في باتنا. وقال إن شهرًا قد مضى على الهجوم الإرهابي في بهلغام، ومع ذلك لم يتم إطلاع الشعب على أي معلومات ملموسة، ولم يُعتقل أي إرهابي حتى الآن.

وأشار إلى أنه في الوقت الذي وقع فيه الهجوم، توجه رئيس الوزراء إلى منطقة "مَدهُبني" بدلاً من بهلغام، وأطلق هناك تصريحات نارية ضد الإرهابيين، لكن لم تظهر حتى الآن أي خيوط توصل إلى منفذي الهجوم. كما أن الحكومة لم تتخذ أي خطوة لتقديم التعزية أو المساعدة لأسر المواطنين الهنود الذين قُتلوا في الهجوم الباكستاني المضاد خلال عملية "سِندور".

وقال الرفيق ديبانكار إن للهند تاريخًا مجيدًا في النضال ضد الإمبريالية، حيث لعبت منطقة شاه آباد دورًا مهمًا في حرب الاستقلال الأولى بقيادة البطل "كونور سينغ" وبوحدة الهندوس والمسلمين. لكنه أشار إلى أن الحكومة الحالية بقيادة مودي قد استسلمت بالكامل أمام الولايات المتحدة وترامب.

واتهم بهاتاشاريا الحكومة بالصمت المخزي تجاه الإهانات التي وجهتها أمريكا للهند، بما في ذلك الإخلاء المهين للمواطنين الهنود، وفرض الرسوم الجمركية بشكل تعسفي، وإعلان ترامب الأحادي لوقف إطلاق النار بين الهند وباكستان. وقال إن عزلة الهند خلال عملية "سندور" كانت دليلًا على فشل دبلوماسي كبير لحكومة مودي.

وأضاف أن الحكومة ترفض دعوة المعارضة لعقد جلسة خاصة للبرلمان لمناقشة هذه القضايا، في حين ينشغل أعضاء البرلمان في جولات خارجية.

وأكد على أن وصول "تحالف الهند" إلى السلطة في بيهار أصبح ضرورة لضمان أمن المواطنين والقضاء على الفساد.

كما أدان الأمين العام للحزب بشدة المجزرة الوحشية التي وقعت في منطقة نارايانبور-بيجابور في تشاتيسغره، والتي راح ضحيتها عدد من نشطاء الحزب الشيوعي (الماوي) بمن فيهم الأمين العام كيشاف راو، إلى جانب مدنيين من السكان الأصليين. وانتقد تقديم وزير الداخلية أميت شاه للخبر بأسلوب احتفالي، معتبراً أن هذا يُظهر أن الحكومة تشن حملة عسكرية منظمة تحت اسم "عملية كَغار"، تتجاوز المسار القضائي وتستهدف سحق أصوات السكان الأصليين المعارضة للنهب العسكري والهيمنة الشركاتية تحت غطاء مكافحة الماويين.

وطالب بإجراء تحقيق قضائي مستقل في هذه المجزرة، ووقف العمليات العسكرية فورًا، خاصة في ظل إعلان الماويين من جانب واحد وقفًا لإطلاق النار.


وفي نفس المؤتمر الصحفي:

قالت الرفيقة "شاشي ياداف" – عضو مجلس الولاية وزعيمة اتحاد العاملين في البرامج الصحية – إن عاملات الصحة في بيهار (آشا) مضربات عن العمل منذ 20 مايو. وطالبت بتنفيذ الاتفاقيات السابقة فورًا، ودمج مطالب عاملات المطبخ ورياض الأطفال ضمن هذا الإطار.

وحذّرت من أنه إذا لم تتم الاستجابة الفورية لتلك المطالب، فسيتم محاصرة وزراء الحكومة ورئيسها في كل مكان.

وقال النائب عن كاراكات والأمين العام الوطني للاتحاد الفلاحي "راجارام سينغ" إن رئيس الوزراء ناريندرا مودي سيزور منطقة "فيكرامجَنج" في 30 مايو 2025. وبهذه المناسبة سيطرح الفلاحون والمواطنون مطالبهم، ومنها:

  • الإسراع في إنشاء خزان "إندرپوري"،

  • تحديث قنوات "سون" وضمان وصول المياه على مدار السنة حتى آخر نقطة،

  • الإسراع في تنفيذ مشاريع الري: "دورگاوتي"، "مالاي براج" و"كويل الشمالية"،

  • تركيب بوابات سد "كوتكو"،

  • إعادة تشغيل الصناعات المتوقفة في "دالمياناغَر"،

  • الإسراع في إنشاء مصنع السكك الحديدية في "دالمياناغَر"،

  • دفع تعويضات عادلة للمزارعين مقابل أراضيهم المصادرة لصالح مشروعي "بهارات مالا" والطريق السريع، بموجب قانون 2013 على أساس سعر السوق مضروبًا في أربعة

  • إيقاف مصادرة الأراضي بالقوة بدون تعويض،

  • سحب السياسة الوطنية بشأن التسويق،

  • ضمان شراء حكومي لكل المحاصيل مع تطبيق قانوني لتحديد الحد الأدنى للسعر (MSP) وفقًا لصيغة "C2+50%"،

  • إعادة تفعيل قانون "APMC" في بيهار وإحياء أسواق المزارعين.

وأعلن أنه سيتم تنظيم اعتصامات في جميع مناطق "شاه آباد" و"مَغَده" في 28 مايو.

حضر المؤتمر أيضًا الرفيق "كونال" – سكرتير الحزب في الولاية، وعضو المكتب السياسي "دهيريندرا جها"، ونائب زعيم الكتلة البرلمانية "ساتي ديف رام".

भाकपा-माले (चुनाव चिन्ह: झंडा पर तीन तारा) | Bihar State Committee of Communist Party of India (Marxist Leninist) Liberation.



الشرف والمجد للرفيق باسووراج/ نامبالا كيشافا راو

ببالغ الإجلال والإكبار، نقف احتراما امام استشهاد القائد الثوري الرفيق باسووراج (نامبالا كيشافا راو)، الأمين العام للحزب الشيوعي الهندي (الماوي)، الذي كرّس حياته كاملةً لقضية الكفاح والثورة ، ومضى شهيدًا في سبيل حرية الشعب.
لقد كانت حياته تجسيدًا حيًا لكيفية صمود الثوري الماركسي أمام أقسى التحديات وأصعب الظروف. لم تثنه المخاطر، ولم تفتّ في عضده المحن. بل شكّلت التحولات الثورية التي عايشها أرضًا خصبة لنموه الفكري والعملي، ولتشكله كثائر صلب وعنيد.
امتزجت في شخصيته صفات نادرة من الإصرار، والشجاعة، والإبداع، وبلغت قمتها في عزّ الكفاح. حتى آخر لحظة، ظل مؤمنًا بالعمل الجماعي، وخصمًا للفردية، مدافعًا عن روح التضحية الجماعية التي تُعد جوهر كل ثورة حقيقية.
لقد أدى دورًا محوريًا في بناء الهياكل الثورية في الهند، وكان من القادة القلائل الذين أسسوا لحركة دانداكارانيا وأسهموا بعمق في زرع بذور الديمقراطية الشعبية الثورية في أكثر المناطق تهميشًا.
وُلد الرفيق كيشافا راو في قرية "جييانابيته" بمنطقة سريكاكولام، في ولاية أندرا براديش. ومنذ شبابه المبكر، انخرط في صفوف الثورة. في عام 1973، كان أحد مؤسسي اتحاد طلاب الثورة في كلية الهندسة الإقليمية، حيث حوّلها إلى "كلية الهندسة الراديكالية"، متحديًا الطائفية والقمع السياسي. ومع إعلان الطوارئ، اختار طريق العمل السري، ولم يعد للحياة العلنية بعدها.
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إسهاماته العسكرية والتنظيمية
كان قائدًا عسكريًا بارعًا واستراتيجيًا في حرب العصابات.
في عام 1980، تولى قيادة أول فرقة ثورية في غابات "إيست جودافاري"، تحت الاسم الحركي "غانغانا"، قبل أن يصبح شخصية محورية في حركة دانداكارانيا. نجا من محاولات الاعتقال، واستمر في قيادة العمل الثوري دون انقطاع.
ساهم في تشكيل جيش التحرير الشعبي لحرب العصابات (PLGA) عام 2004، ودرّب وحداته في ولايات عدة، وكان مشاركًا مباشرًا في عمليات عسكرية كبيرة ضد أجهزة القمع، منها:
• هجوم سوكما 2018: قتل فيه 9 من قوات CRPF.
• انفجار جادشيرولي 2019: قُتل فيه 15 شرطيًا وسائق.
• كمين سوكما-بيجابور 2021: مقتل 22 جنديًا.
• انفجار دانتيوادا 2023: مقتل 10 جنود وسائق.
• هجوم بيجابور 2025: مقتل 8 جنود وسائق مدني.
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قيادة الحزب والوحدة الثورية
في تاريخ الحركة الشيوعية في الهند، لعب الرفيق باسووراج دورًا أساسيًا في توحيد الفصائل الماوية. بعد اندماج "حرب الشعب" و"وحدة الحزب" عام 1998، ثم مع "MCCI" في 2004، تشكل الحزب الشيوعي الهندي (الماوي)، وكان للرفيق ب. ر. دور محوري في تثبيت هذا الكيان على أسس صلبة.
في عام 2018، في سن الـ65، تولى أمانة الحزب في وقت كانت الثورة تمر فيه بأزمة داخلية. قاد الحزب خلال أصعب الظروف، بكل حزم وصلابة، حتى لحظة استشهاده.
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تحية الوداع
لم يكن الرفيق باسووراج مجرد قائد، بل رمزًا لثبات الثوري، وتجسيدًا لروح الثورة في أكثر تجلياتها صدقًا وبسالة.
سنبقى نستلهم من حياته واستشهاده نور طريق الثورة ، وسيظل اسمه محفورًا في ذاكرة الشعوب والأمم المكافحة، وفي قلوب الشباب الثائر.
نعم، ناكسالباري لن تموت أبدًا.
الثورة مستمرة حتى النصر.
المجد للشهداء...
المجد للرفيق باسووراج!

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